कही तो कही तो
होगी वो
दुनियाँ जहा तु मेरे साथ है
जहाँ मै जहाँ तु
और जहाँ बस तेरे मेरे जज्बात है
होगी जहाँ सुबह तेरी
पलको कि किरण मै
लोरी जहाँ चाँदकी
सुने तेरी बाहो मै
जाने न कहाँ वो दुनियाँ है
जाने न वो है भी या नही
जहाँ मेरी जीन्दगी मुझ्से
इत्नी खफा नही
सासे खो गयी है किस्की आहोँमै
मै खो गयी हुँ जाने किस्की बाहो मै
मन्जिलोसे राहे ढुडती चली
और खो गयी है मन्जिल कही राहो मै
कही तो कही तो है नसा
तेरी मेरी हर मुलाकात मै
होठोसे होठोको
चुमती और रहेते है हम हर बात पे
कहती है फिजा जहाँ
तेरी जमीन आसमान
जहाँ है तु
मेरी हसी मेरी खुशी
मेरी जान
जाने न कहाँ वो दुनियाँ है
जाने न वो है भी या नही
जहाँ मेरी जीन्दगी मुझ्से
इत्नी खफा नही
1 comment:
Ramesh ji,
Did u compose this poem in Hindi? It's great! Though i do not know meaning of few words like 'jajbat', I thoroughly enjoyed reading it. Expect more of this in future!
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